इस साल काबू में रहेगी खाद्य महंगाई

घरेलू स्तर पर आपूर्ति के मुकाबले मांग कम रहने और विदेशी बाजारों में कीमतें अधिक नहीं रहने से इस साल की शेष अवधि में खाद्य महंगाई अधिक नहीं रहने की उम्मीद है। दालों के मामले में त्योहार शुरू होने के बाद भी मांग नहीं बढ़ी है। वहीं, चावल की बोआई कम हुई है, लेकिन सरकार के पास इसका विशाल भंडार है, जो कीमत को अधिक बढ़ने नहीं देगा। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस साल की शेष अवधि में समग्र खाद्य महंगाई कम ही रहेगी। उनके मुताबिक विदेशी बाजारों में भी खाद्य कीमतें कम रहने के कारण भारत में खाद्य महंगाई बढ़ने की संभावना नहीं है।

एमएसपी से कम चल रही हैं दालों की कीमतें
इस साल की पहली छमाही में दालों की कीमत में थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, लेकिन त्योहार शुरू होने के बाद भी मांग में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने से इनकी कीमतें अब दबाव में आ गई हैं। बिजनेस लाइन के मुताबिक विभिन्न बाजारों में दालों की कीमत पिछले महीने की तुलना में कम चल रही हैं। इसके साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुकाबले भी इनकी कीमतें कम हैं। कम मांग और अधिक आपूर्ति की स्थिति बनने से आने वाले महीनों में कीमतों में और गिरावट आने का अनुमान है।

नवंबर में नई फसल आने से भी घटेंगी कीमत
नवंबर तुअर, उरद और मूंग की नई फसल आ जाएगी। इसके कारण कीमत में गिरावट का दबाव और बढ़ जाएगा। इसके अलावा केंद्र सरकार के पास दालों का विशाल भंडार है। इसलिए कीमत बढ़ने की किसी भी आहट पर सरकार खुले बाजार में दालों की आपूर्ति बढ़ा सकती है।

चावल का उत्पादन कम रहने के बावजूद नहीं बढ़ेगी कीमत
जहां तक चावल की बात है, तो चालू खरीफ सत्र में इसकी बोआई पिछले साल के मुकाबले 23 फीसदी कम होने के बाद भी इसकी कीमत नहीं बढ़ेगी। केंद्र सरकार के पास चावल का विशाल भंडार है। कीमत बढ़ने की किसी भी आशंका पर वह बाजार में चावल की आपूर्ति बढ़ा सकती है।

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