जेट एयरवेज के खिलाफ बैंक दिवालिया अदालत जाएंगे, बिडिंग में सिर्फ एक सशर्त बोली मिली

इमरजेंसी फंड नहीं मिलने की वजह से जेट एयरवेज की उड़ानें 17 अप्रैल से बंद हैं एयरलाइन पर 8000 करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज, कुल देनदारियां 25000 करोड़ रुपए तक जेट एयरवेज में हिस्सेदारी बेचने के लिए उसके कर्जदाता बैंकों ने बोलियां मांगी थीं

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जेट एयरवेज के कर्जदाताओं ने दिवालिया अदालत (एनसीएलटी) जाने का फैसला किया है। एसबीआई के नेतृत्व में कर्जदाताओं की सोमवार को हुई बैठक में यह तय किया गया। बिडिंग प्रक्रिया के जरिए बैंकों ने जेट में हिस्सेदारी बेचने की कोशिश की थी। एसबीआई ने बताया कि बिडिंग में सिर्फ एक सशर्त बोली मिली।

जेट के खिलाफ 2 वेंडर कंपनियां पहले ही दिवालिया कोर्ट जा चुकीं
एसबीआई का कहना है कि निवेशक सेबी से कुछ छूट चाहते हैं। इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के तहत यह डील बेहतर तरीके से हो सकती है। कर्जदाताओं ने आईबीसी के बाहर समाधान तलाशने की पूरी कोशिश की।

इससे पहले 10 जून को जेट की दो वेंडर कंपनियां शमन व्हील्स और गागर इंटरप्राइजेज नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) पहुंचीं थीं। उनकी याचिका पर 20 जून को सुनवाई होगी। ट्रिब्यूनल ने दोनों कंपनियों से कहा था कि जेट एयरवेज को लीगल नोटिस भेजें। जेट पर शमन व्हील्स के 8.74 करोड़ रुपए और गागर इंटरप्राइजेज के 53 लाख रुपए बकाया हैं।

इमरजेंसी फंड नहीं मिलने की वजह से जेट एयरवेज का संचालन 17 अप्रैल से बंद है। एयरलाइन पर 8,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। वेंडर के बकाया और कर्मचारियों के वेतन समेत 25,000 करोड़ रुपए तक की देनदारियां हैं।

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