बजट बाद FIIs ने की 11500 करोड़ की बिकवाली, DIIs की खरीददारी से भी नहीं मिल रहा सपोर्ट

विदेशी निवेशकों पर भी लागू है सुपररिच टैक्स नीतिगत अनिश्चितता से भी बाजार पर बना है प्रेशर ब्राजील सहित दूसरे इमर्जिंग मार्केट का रुख कर रहे एफआईआई

5 जुलाई को आम बजट, 2019-20 पेश होने के बाद विदेशी निवेशक (एफआईआई) भारतीय शेयर बाजार में लगभग 11,500 करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं। इससे बाजार पर लगातार दबाव बना हुआ है और सेंसेक्स लगभग 5 फीसदी कमजोर हो चुका है। हालांकि इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) बाजार में लगभग 12,500 करोड़ रुपए की लिवाली कर चुके हैं, लेकिन इससे भी बाजार को सपोर्ट नहीं मिला है। मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक, बजट में सुपररिच पर सरचार्ज और नीतिगत अस्थिरता से बाजार में यह बिकवाली देखने को मिल रही है।

बजट के बाद से जारी है एफआईआई की बिकवाली
5 जुलाई से ही भारतीय शेयर बाजार में एफआईआई की बिकवाली जारी है। तब से अब तक एफआईआई ने शेयर बाजार में लगभग 55,500 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे, हालांकि इस दौरान लगभग 67,000 करोड़ रुपए की बिकवाली की। इस प्रकार एफआईआई ने कुल 11500 करोड़ रुपए की बिकवाली की। वहीं डीआईआई ने 5 अगस्त से अब तक 57 हजार करोड़ रुपए के शेयर खरीदे और 44 हजार करोड़ रुपए की बिकवाली की। इस प्रकार डीआईआई ने बजट के बाद कुल 13 हजार करोड़ रुपए की खरीददारी की।

इन 5 वजहों से है बाजार पर प्रेशर

  1. मार्केट एक्सपर्ट संदीप जैन के मुताबिक, आम बजट में सुपररिच पर लगा टैक्स शेयर बाजार पर भारी पड़ रहा है। इसके चलते विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकाल रहे हैं। दरअसल यह सुपररिच टैक्स अमीरों के साथ ही विदेशी निवेशकों यानी फॉरेन पोर्टफोलियो निवेशकों पर भी लागू है। एक अन्य मार्केट एक्सपर्ट सचिन सर्वदे भी सुपररिच पर टैक्स को बाजार में गिरावट की बड़ी वजह मानते हैं।

2.सर्वदे ने कहा कि विदेशी निवेशक भारत की तुलना में अन्य इमर्जिंग मार्केट में रिटर्न के अच्छे मौके देख रहे हैं। दिलचस्प है कि भारत को छोड़कर अधिकांश बाजारों ने बीते एक महीने में अच्छा रिटर्न दिया है। ब्राजील तो बीते एक महीने में 18 फीसदी रिटर्न दे चुका है।

  1. जैन ने कहा कि इन दिनों देश में नीतिगत अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। बार-बार नियमों में बदलाव से बाजार के प्रति निवेशकों का भरोसा मजबूत नहीं हो पा रहा है। ऐसे में निवेशक भारत से पैसा निकालकर सुरक्षित बाजारों में लगा रहे हैं।
  2. लिस्टेड कंपनियों में पब्लिक शेयरहोल्डिंग की सीमा 75 फीसदी से घटाकर 65 फीसदी किए जाने और बायबैक पर टैक्स का प्रस्ताव भी शेयर बाजार पर दबाव की वजह हैं।
  3. इन दिनों गोल्ड जैसी अन्य एसेट क्लास में रिटर्न के अच्छे मौके बने हैं। हाल में भारत में गोल्ड अपने अभी तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।

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