सेबी के एक्शन के बाद मिडकैप में बढ़ेगी गिरावट, फेयर वैल्युएशन का इंतजार करें निवेशक

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स्टॉक एक्सचेंज बीएसई ने 109 कंपनियों को एडिशनल सर्विलांस मीजर की लिस्ट में डाल दिया है। वहीं, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने भी 109 कंपनियों पर सर्विलांस बढ़ा दिया है। ऐसा मिडकैप कंपनियों में सट्टेबाजी बढ़ने के डर से किया गया है। सेबी के इस कदम के बाद से मिडकैप इंडेक्स में मंगलवार को करीब 200 अंकों की गिरावट दिखी। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि सेबी का यह फैसला तो सही है, लेकिन गलत समय पर लिया गया है। पहले से ही दबाव में चल रहे मिडकैप इंडेक्स में गिरावट बड़ी होने का डर है। फिलहाल निवेशकों को अच्छे मिडकैप शेयरों का वैल्युएशन फेसर होने का इंतजार करना चाहिए।अब कैसे होगी इन कंपनियों में ट्रेडिंग  

फॉर्च्युन फिस्कल के डायरेक्टर जगदीश ठक्कर का कहना है कि मार्केट रेग्‍युलेटर सेबी की ओर से जारी नए नियमों के अनुसार, अब निवेशक इन 109 कंपनियों के स्‍टॉक में ट्रेडिंग के लिए जितनी मार्जिन मनी देंगे, उतनी ही वैल्‍यू के सौदे की खरीद-बिक्री कर सकते हैं। पहले निवेशकों को मार्जिन मनी का 10 गुना ज्‍यादा तक खरीद-बिक्री की अनुमति थी। जैसेकि, नए नियमों के अनुसार, यदि आपने शेयर ट्रेडिंग के लिए एक लाख रुपए मार्जिन मनी जमा किया है तो अब 50 हजार रुपए की खरीद और 50 हजार रुपए की बिक्री कर सकेंगे। पहले यह लिमिट मार्जिन मनी का 10 गुना थी। यानी आप महज 1 लाख रुपए देकर 5-5 लाख रुपए के शेयर खरीद-बेच सकते थे।

उनका कहना है कि पुराने नियमों के चलते बाजार में सट्टेबाजी ज्‍यादा हो रही थी। जिसके चतले कई छोटी कंपनियों के स्‍टॉक मल्‍टीबैगर बन गए थे। इससे खासतौर से मिडकैप और स्मालकैप में बड़ा रिस्क बन गया था। मिडकैप सेग्मेंट में लगातार खरीददारी की वजह से कई शेयरों की कीमत बढ़ रही थी। शेयर का वैल्युएशन की मैचिंग उसके परफॉर्मेंस से नहीं हो रही थी, जिससे इनमें बड़ा रिस्क बनता जा रहा था।

फैसला लेने का समय गलत
ट्रेड स्विफ्ट के रिसर्च हेड संदीप जैन का कहना है कि रेग्युलेटर का फैसला लॉंग टर्म में निवेशकों के हित के लिहाज से सही है, लेकिन इसे लेने में समय गलत चुना गया। रेग्युलेटर को यह फैसला तब लेना चाहिए था, जब इस सेग्मेंट में शेयर तेजी से भाग रहे थे। 9 जनवरी को मिडकैप में ऑलटाइम हाई के बाद देखें तो इंडेक्स 15 फीसदी तक करेक्ट हो चुका है। कई अच्दे शेयरों में अच्छी गिरावट आ चुकी है। ऐसे समय में इस फैसले से मिडकैप और स्मालकैप में अभी गिरावट और बढ़ेगी।

इंडेक्स में आई थी 47 फीसदी तेजी
2017 में अच्छी तेजी दर्ज करने के बाद मिडकैप शेयरों का वैल्युएशन बहुत ज्यादा हो गया था। इस साल 9 जनवरी को बीएसई मिडकैप इंडेक्स 18321 के लेवल पर पहुंचा जो ऑलटाइम हाई है। वहीं, 10 जनवरी 2017 को यह इंडेक्स 12448 के लेवल पर था। यानी एक साल में इंडेक्स में 47 फीसदी तेजी आई थी। इस दौरान कई मिडकैप शेयर महंगे हो गए। लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार इस तरह की ज्यादातर कंपनियां अपनी वैल्यूएशन के साथ इंसाफ नहीं कर पा रही है और महंगी लग रही हैं। जिसकी वजह से उनमें दबाव है। पिछले दिनों इसी वजह से मिडकैप में बिकवाली भी बढ़ी है।

ये फैक्टर भी डाल रहे हैं असर 
इसके अलावा क्रूड की ऊंची कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में ग्रोथ, रुपए में कमजोरी और पॉलिटिकल अनसर्टेनिटी की वजह से मार्केट सेंटीमेंट कमजोर हुआ है उसका असर भी मिडकैप शेयरों पर दिख रहा है। पिछले कई महीनों से घरेलू निवेशक खरीददार रहे हैं, लेकिन सर्विलांस बढ़ाए जाने से वे बिकवारली कर सकते हैं। ऐसा हुआ तो खासतौर से मिडकैप और स्मालकैप पर ज्यादा असर होगा।

क्या करें निवेशक
मार्केट के जानकार कहते हैं कि सेबी की सख्‍ती निवेशकों के लिए बेहतर है और इससे अच्छे फंडामेंटल वाले शेयरों में ज्यादा चिंता करने वाली बात नहीं है। निवेशकों को मिडकैप में अभी इंतजार करना चाहिए। बहुत से शेयर अभी भी हाई वैल्युएशन पर हैं। ऐसे में गिरावट के बाद फेयर वैल्युएशन का इंतजार करना चाहिए। अच्छे फंडामेंटल वाले शेयर अगर फेयर वैल्युएशन पर आते हैं तो उनमें खरीद का फिर मौका बनेगा।

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